धार्मिकपंचांग

प्रदोष व्रत 2 दिसंबर 2025: पुण्य, शांति और शिव-कृपा का पावन अवसर

## प्रदोष व्रत का महत्व
आज 2 दिसंबर को प्रदोष व्रत का पावन दिन मनाया जा रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संध्याकालीन आराधना का विशेष विधान है। मान्यता है कि प्रदोष व्रत धारण करने से साधक को शिव-कृपा प्राप्त होती है, जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं। इस दिन पूजा के साथ-साथ विशेष वस्तुओं का दान भी अत्यंत फलदायी माना गया है।

## आज का पंचांग: 2 दिसंबर 2025
तिथि: शुक्ल द्वादशी (प्रातः 03:57 बजे तक)
मास (पूर्णिमांत): मार्गशीर्ष
दिन: मंगलवार
संवत्: 2082
योग: वारियाना (रात्रि 09:08 बजे तक)
करण: बालव (प्रातः 03:57 बजे तक), कौलव (03 दिसंबर, प्रातः 02:14 बजे तक)

## सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्र ग्रहणीय विवरण
सूर्योदय: 06:57 बजे
सूर्यास्त: 05:24 बजे
चंद्रोदय: 02:29 बजे दोपहर
चंद्रास्त: 03 दिसंबर, 04:53 बजे
सूर्य राशि: वृश्चिक
चंद्र राशि: मेष

## आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: 11:50 बजे से 12:31 बजे तक
अमृत काल: 02:23 बजे से 03:49 बजे तक

## अशुभ समय (दोष काल)
राहुकाल: 02:47 बजे से 04:06 बजे तक
गुलिकाल: 12:11 बजे से 01:29 बजे तक
यमगण्ड: 09:34 बजे से 10:52 बजे तक

## आज का नक्षत्र: अश्विनी
अश्विनी नक्षत्र अवधि: रात्रि 08:51 बजे तक
विशेषताएं: तेजस्वी, सुंदर व्यक्तित्व, आभूषण-प्रिय, बुद्धिमान, यात्राप्रिय, नेतृत्व क्षमता से युक्त, जोशीले और अधीर स्वभाव वाले
शासक ग्रह: केतु
राशि स्वामी: मंगल
देवता: अश्विनी कुमार
प्रतीक: घोड़े का सिर

# भौम प्रदोष व्रत: धर्म, श्रद्धा और आशीर्वाद

## भौम प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
जब प्रदोष का समय मंगलवार को पड़ता है, तब भौम प्रदोष व्रत मनाया जाता है। यह व्रत विशेषतः भगवान शिव को समर्पित है और जीवन में शांति, रोगमुक्ति, समृद्धि तथा संकट-निवारण के लिए किया जाता है। श्रद्धालु सुबह स्नान कर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फल अर्पित करते हैं। उपवास या फलाहार करते हुए संध्या के प्रदोषकाल में रुद्राभिषेक और भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।

## भौम प्रदोष व्रत विधि
• प्रातःकाल स्नान कर मन और शरीर को शुद्ध करें
• घर में शिवलिंग स्थापित कर या मंदिर जाकर पूजा करें
• शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धूप और दीप चढ़ाएं
• व्रत के दौरान फलाहार या निर्जल उपवास करें
• संध्याकाल में रुद्राभिषेक, शिव-पूजन और कीर्तन करें
• “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें
• क्रोध, नकारात्मकता और बुरे विचारों से दूर रहें
• अगले दिन व्रत का पारण करें
• जरूरतमंद व्यक्तियों या ब्राह्मण को दान दें

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