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आज का पंचांग 15 दिसंबर 2025: सफला एकादशी व्रत का महत्व और शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज का पंचांग: 15 दिसंबर 2025

पंचांग के अनुसार आज 15 दिसंबर 2025 को सफला एकादशी का पावन व्रत रखा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस व्रत को अत्यंत फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि सफला एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति व समृद्धि का आगमन होता है। इस शुभ अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है। आइए विस्तार से जानते हैं आज का पंचांग और सफला एकादशी का महत्व।

आज की तिथि एवं संवत विवरण

आज पौष मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि है। दिन सोमवार है और विक्रम संवत 2082 चल रहा है। एकादशी तिथि रात्रि 09 बजकर 19 मिनट तक रहेगी, इसके पश्चात द्वादशी तिथि प्रारंभ होगी।

योग और करण की स्थिति

आज शोभन योग दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। करण की बात करें तो प्रातः 08 बजकर 03 मिनट तक बव करण रहेगा, इसके बाद बालव करण रात्रि 09 बजकर 19 मिनट तक प्रभावी रहेगा।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय

आज सूर्य का उदय प्रातः 07 बजकर 06 मिनट पर होगा और सूर्यास्त सायं 05 बजकर 26 मिनट पर होगा। चंद्रमा का उदय 16 दिसंबर को प्रातः 03 बजकर 45 मिनट पर तथा चंद्रास्त दोपहर 02 बजकर 04 मिनट पर होगा।

सूर्य और चंद्रमा की राशियां

आज सूर्यदेव वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रदेव तुला राशि में संचार करेंगे।

आज के शुभ मुहूर्त

आज अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल 16 दिसंबर को प्रातः 04 बजकर 15 मिनट से 06 बजकर 03 मिनट तक रहेगा, जो शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।

आज के अशुभ समय

आज राहुकाल प्रातः 08 बजकर 24 मिनट से 09 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। गुलिकाल दोपहर 01 बजकर 34 मिनट से 02 बजकर 51 मिनट तक और यमगण्ड प्रातः 10 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इन समयों में शुभ कार्यों से बचना उचित माना जाता है।

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव चित्रा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे। चित्रा नक्षत्र प्रातः 11 बजकर 08 मिनट तक रहेगा। इस नक्षत्र में जन्मे लोग बुद्धिमान, साहसी, ऊर्जावान और आकर्षक व्यक्तित्व के होते हैं। चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं, जबकि इसके देवता त्वष्टा माने जाते हैं। इसका प्रतीक रत्न है।

सफला एकादशी का धार्मिक महत्व

सफला एकादशी पौष मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। यह व्रत पापों का नाश करने वाला और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। उपवास, पूजा, कथा श्रवण और दीपदान से साधक को मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। यह व्रत विशेष रूप से जीवन में स्थिरता और आत्मबल बढ़ाने वाला माना गया है।

सफला एकादशी व्रत की विधि

सफला एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और पूजा स्थल को स्वच्छ रखें। इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान कर व्रत का संकल्प लें। पूजा में पुष्प, धूप, दीप, चावल और तुलसी दल अर्पित करें। दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखें और सफला एकादशी की कथा का श्रवण करें। क्रोध, नकारात्मक विचार और विवाद से दूर रहकर सात्विक जीवन शैली अपनाएं। संध्या के समय दीपदान और आरती करें, क्योंकि इसे अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। अगले दिन द्वादशी तिथि पर सात्विक भोजन से पारण करें और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान कर व्रत को पूर्ण करें।

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