
मुख्यमंत्री श्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने वर्ष 2025 में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव और समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहलें की हैं। गन्ने की फसल के भाव में रिकॉर्ड वृद्धि, फसली विविधता अभियान और टिकाऊ कृषि प्रथाओं को अपनाना इस वर्ष की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं।
किसानों के हित में गन्ने की कीमत में वृद्धि
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के अनुसार, प्रदेश सरकार ने गन्ना उत्पादकों के लिए स्टेट एग्रीड प्राइस (एस.ए.पी.) 416 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष से 15 रुपये अधिक है। यह कदम किसानों की मेहनत के सम्मान और प्रदेश में गन्ना उत्पादकों को देश में सबसे अधिक कीमत सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
पराली जलाने में कमी और फसली अवशेष प्रबंधन
प्रदेश सरकार के प्रयासों से खरीफ सीजन में पराली जलाने की घटनाओं में 53 प्रतिशत कमी आई है। वर्ष 2025 में पराली जलाने के मामले घटकर 5,114 रह गए। 2018 से अब तक 1.58 लाख से अधिक फसली अवशेष प्रबंधन (सी.आर.एम.) मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई गई हैं, जबकि इस वर्ष 16,000 से अधिक मंजूरी पत्र जारी किए गए।
फसली विविधता और बीज सब्सिडी
कपास की खेती में क्षेत्र 20 प्रतिशत बढ़कर 1.19 लाख हेक्टेयर हो गया। किसानों को बी.टी. कॉटन बीजों पर 33 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 52,000 से अधिक किसानों ने ऑनलाइन पंजीकरण कर सब्सिडी का लाभ लिया, जो सरकारी पहलकदमियों में उनके विश्वास को दर्शाता है।
जल संरक्षण के लिए धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक
प्रदेश सरकार ने भूमिगत जल संरक्षण हेतु धान की सीधी बिजाई (DSR) तकनीक लागू की है। इस तकनीक के तहत किसानों को 1,500 रुपये प्रति एकड़ की वित्तीय सहायता दी जाती है। वर्ष 2025 में इस तकनीक के तहत क्षेत्र में 17 प्रतिशत वृद्धि हुई, जो पिछले वर्ष 2.53 लाख एकड़ से बढ़कर 2.96 लाख एकड़ हो गया।
बासमती और खरीफ फसलों का विस्तार
बासमती की खेती का क्षेत्र पिछले वर्ष के 6.81 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.90 लाख हेक्टेयर हो गया। यह वृद्धि बासमती को पंजाब के किसानों के लिए एक लाभदायक विकल्प बनाती है, जो घरेलू और निर्यात दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
धान से मक्की तक फसली चक्र में बदलाव
फसली विविधता के प्रयासों के तहत पंजाब ने धान आधारित फसली चक्र में बदलाव किया। बठिंडा, संगरूर, गुरदासपुर, जालंधर, कपूरथला और पठानकोट जिलों में 11,000 एकड़ से अधिक क्षेत्र में खरीफ मक्की की खेती की गई। मक्की की खेती करने वाले किसानों को 17,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और आर.के.वी.वाई. के तहत 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की पूरक सहायता दी गई।


