
पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में मंगलवार को ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ कानून को लेकर जोरदार बहस हुई। इस दौरान मनरेगा को जारी रखने और केंद्र सरकार द्वारा किए गए बदलावों के विरोध में प्रस्ताव ध्वनि मत से पास कर दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आरोप लगाया कि भाजपा ने मनरेगा को समाप्त कर दलितों और गरीबों के रोजगार की गारंटी छीन ली है। उन्होंने भाजपा से इस कानून को तुरंत वापस लेने और मनरेगा को पुनः लागू करने की मांग की।
नए कानून की गंभीर आलोचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कर इसकी मूल भावना ही समाप्त कर दी है। इसके तहत गरीब मजदूरों, महिलाओं और लाखों जॉब कार्ड धारक परिवारों से गारंटीड रोजगार का अधिकार छीन लिया गया है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाला गया है।
उन्होंने बताया कि मनरेगा एक मांग-आधारित योजना थी, जबकि नई योजना मानकों पर आधारित है, जो आम जनता के हित में नहीं है। पिछले वित्त वर्ष में पंजाब में मनरेगा के तहत महिलाओं की भागीदारी 60% और अनुसूचित जातियों की भागीदारी 70% रही, जो इस योजना के लाभार्थियों की सामाजिक स्थिति को दर्शाता है।
कमजोर वर्गों पर आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि नए कानून से कमजोर वर्गों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह कानून अनुसूचित जातियों और महिलाओं को कमजोर करने की साजिश है, जिससे असमानता बढ़ेगी और अनावश्यक पीड़ा उत्पन्न होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का यह कदम आम आदमी से भोजन छीनने की सोची-समझी कोशिश है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को फसलों पर एमएसपी की गारंटी देने के बजाय मजदूरों से उनके काम की गारंटी भी छीनने का मुद्दा उठाया और इसे केंद्र की ‘अपने उद्योगपतियों को लाभ’ पहुंचाने वाली नीति से जोड़कर देखा।
पंजाब विरोधी नीतियों का आरोप
भगवंत मान ने कहा कि भाजपा पंजाब-विरोधी सोच से ग्रस्त है और लगातार राज्य के हितों के खिलाफ फैसले ले रही है। उन्होंने चंडीगढ़, पंजाब विश्वविद्यालय और भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड जैसे मामलों का उदाहरण देते हुए केंद्र सरकार पर पंजाब के अधिकारों को लूटने का आरोप लगाया।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भाजपा और एनडीए सरकार की मनमानी जारी रही, तो राष्ट्रीय प्रतीकों में भी पंजाब का स्थान खतरे में पड़ सकता है।
सामाजिक असमानता और गरीब विरोधी कदम
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर बड़े उद्योगपतियों को सब्सिडी मिल रही है, वहीं गरीब-हितैषी योजनाओं के बजट में कटौती की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि गरीबों से बुनियादी सुविधाएं और रोजगार छीनकर भारत कैसे ‘विकसित’ बन सकता है। उन्होंने अकाली दल की चुप्पी पर भी सवाल उठाया और कहा कि यह गठबंधन केवल अपनी राजनीतिक मंशा के लिए मौन है।
राज्य सरकार की जन-हितैषी पहलें
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार अनुसूचित जातियों के वकीलों और छात्रों के लिए आरक्षण जैसी जन-हितैषी पहल कर रही है। उन्होंने जनता से अपील की कि इस गरीब-विरोधी कदम के खिलाफ एकजुट होकर विरोध करें। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार इस बिल का पूरी ताकत से विरोध करेगी और केंद्र की ‘नापाक मंशा’ को सफल नहीं होने देगी।
कांग्रेस पर कटाक्ष
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला करते हुए कहा कि वह इस मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कांग्रेस से स्पष्ट रुख मांगा कि वह नई योजना को स्वीकार करती है या नहीं। सुखपाल सिंह खैरा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि कुछ नेता केवल व्यक्तिगत प्रचार में लगे हुए हैं और जनता और राज्य के मुद्दों को नजरअंदाज कर रहे हैं।



