
देहरादून: राज्यपाल एवं कुलाधिपति लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने सोमवार को दून विश्वविद्यालय के छठे दीक्षांत समारोह में भाग लिया। समारोह के अवसर पर राज्यपाल ने विभिन्न संकायों के 42 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया, जिनमें से 34 छात्राएँ अव्वल रहीं, जिस पर उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त की।
दीक्षांत केवल उपाधि नहीं, जिम्मेदारी का आरंभ
राज्यपाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत केवल उपाधि प्राप्ति का क्षण नहीं है, बल्कि यह छात्र से जिम्मेदार नागरिक बनने की यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने इसे अमृत पीढ़ी के परिश्रम, अनुशासन और संकल्प का उत्सव बताया। उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों और शिक्षकों को बधाई देते हुए राज्यपाल ने इसे विद्यार्थियों की व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ उनके माता-पिता के त्याग, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विश्वविद्यालय की सकारात्मक शैक्षणिक संस्कृति का परिणाम बताया।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नवाचार पर जोर
इस वर्ष दीक्षांत समारोह की विषयवस्तु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर केंद्रित थी। राज्यपाल ने कहा कि एआई शिक्षा, अनुसंधान और कार्यशैली में नई दिशा दे रहा है। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर गणेश रामकृष्णन द्वारा प्रस्तुत ‘BharatGen’ जैसी स्वदेशी एआई पहल का उल्लेख किया और युवाओं से आह्वान किया कि वे एआई का नैतिक, मानवीय और समाजोपयोगी उपयोग करते हुए उत्तराखंड की भौगोलिक चुनौतियों और स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु नवाचार-आधारित कार्य करें।
विकसित भारत @2047 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति
राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत @2047 का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक गौरव और मानवीय मूल्यों से युक्त राष्ट्र निर्माण है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को दूरदर्शी पहल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब क्रिएटर’ तैयार करना है। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया कि वे अपनी जड़ों से जुड़े रहें, समाज के कमजोर वर्गों के सशक्तीकरण में योगदान दें और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जीवन का मार्गदर्शक बनाएं।
महिलाओं और युवा प्रतिभाओं की भूमिका
राज्यपाल ने छात्राओं की बड़ी भागीदारी पर विशेष प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि महिलाओं की प्रगति ही राज्य की वास्तविक प्रगति है। उन्होंने शिक्षा को केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण की प्रक्रिया बताया और विद्यार्थियों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन और परोपकार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
विश्वविद्यालय और मुख्य वक्ताओं का योगदान
उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने उपाधि धारकों को बधाई दी। विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विश्वविद्यालय की प्रगति, सेंटर फॉर हिंदू स्टडीज और डॉ. अम्बेडकर चेयर के महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता प्रो. गणेश रामकृष्णन ने एआई को अपार संभावनाओं से भरा अवसर बताते हुए विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल उपयोगकर्ता बनने की बजाय निर्माता बनें, ताकि तकनीक समाज और राष्ट्र के लिए सृजन का माध्यम बन सके।
दीक्षांत समारोह में पद्मश्री बसंती बिष्ट, कल्याण सिंह रावत ‘‘मैती’’, डॉ. बी.के.एस. संजय, पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी, विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति, विद्या परिषद एवं कार्य परिषद के सदस्य, छात्र-छात्राएं और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



