उत्तर प्रदेशराज्य

यूपी में नई ट्रांसफर नीति को योगी कैबिनेट की मंजूरी, इस दिन से पूरे प्रदेश में होगी लागू

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए स्थानान्तरण नीति जारी कर दी है, जिसके तहत सभी विभागों में तबादले 31 मई, 2026 तक पूरे किए जाएंगे. नई नीति में पारदर्शिता, संतुलन और संवेदनशील मामलों को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है.

नीति के अनुसार, समूह ‘क’ और ‘ख’ के वे अधिकारी जिन्होंने किसी जनपद में 3 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उनका स्थानान्तरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा. वहीं, जो अधिकारी एक ही मंडल में 7 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं, उन्हें भी उस मंडल से हटाया जाएगा. विभागाध्यक्ष और मंडलीय कार्यालयों में बिताई गई अवधि को इस गणना में शामिल नहीं किया जाएगा.

मंडलीय कार्यालयों में तैनाती की अधिकतम अवधि 3 वर्ष तय की गई है. यहां लंबे समय से कार्यरत अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानान्तरित किया जाएगा. स्थानान्तरण की सीमा भी निर्धारित की गई है. समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के तबादले संबंधित संवर्ग की कुल संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही होंगे, जबकि समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 10 प्रतिशत तय की गई है.

समूह ‘ग’ कर्मचारियों के लिए पटल और क्षेत्र परिवर्तन को अनिवार्य किया गया है. साथ ही, समूह ‘ख’ और ‘ग’ के स्थानान्तरण यथासंभव मेरिट आधारित ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के जरिए किए जाएंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. नीति में मानवीय पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है. गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों के माता-पिता को उनकी सहूलियत के अनुसार ऐसे स्थानों पर तैनात किया जाएगा, जहां बेहतर चिकित्सा और देखभाल की सुविधा उपलब्ध हो.

इसके अलावा, भारत सरकार की तरफ से घोषित प्रदेश के आठ जिलों चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती और बहराइच के साथ ही प्रदेश के घोषित 100 आकांक्षी विकास खण्डों में प्रत्येक विभाग की तरफ से प्रत्येक दशा में सभी पदों पर तैनाती करके उन्हें भरा जाएगा और 2 वर्ष बाद वहां तैनात कार्मिकों से विकल्प प्राप्त कर उन्हें स्थानांतरित किया जाएगा. स्थानान्तरण सत्र के बाद समूह ‘क’ के साथ ही समूह ‘ख’ के अधिकारियों के तबादले विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की मंजूरी से ही किए जाएंगे.

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