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डॉ. रामविलास दास वेदांती का निधन: राम मंदिर आंदोलन का एक युग समाप्त

अयोध्या में शोक की लहर

अयोध्या और पूरे देश में राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार और पूर्व सांसद डॉ. रामविलास दास वेदांती के निधन से शोक व्याप्त है। 67 वर्षीय डॉ. वेदांती का सोमवार को मध्य प्रदेश के रीवा में इलाज के दौरान निधन हो गया। रविवार को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके पार्थिव शरीर को उत्तराधिकारी अयोध्या लाएंगे, जहां पूरे रीति-रिवाज के अनुसार उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. वेदांती के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

जीवन और संघर्ष: सनातन के प्रति समर्पण

7 अक्टूबर 1958 को जन्मे डॉ. रामविलास वेदांती ने अपने जीवन का अधिकांश समय हिंदू धर्म और सनातन परंपरा के संरक्षण में लगाया। वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) से जुड़े और राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के अग्रणी योद्धा बने। 1980 के दशक से वे देशभर में राम मंदिर निर्माण की मांग के लिए अभियानरत रहे। वे राम जन्मभूमि न्यास के सदस्य और अयोध्या के राम वैदेही मंदिर धर्मशाला से जुड़े रहे।

बाबरी ढांचे का विध्वंस और विवाद

6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस राम मंदिर आंदोलन का निर्णायक दिन था। डॉ. वेदांती ने स्वयं कई बार स्वीकार किया कि उन्होंने कारसेवकों को ढांचा गिराने का निर्देश दिया था। इस बयान ने उन्हें विवादों में घेर दिया, लेकिन राम भक्तों के लिए वे नायक बन गए। बाबरी विध्वंस मामले में उन्हें आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

राजनीतिक जीवन: सांसद और पार्टी कार्यकर्ता

डॉ. वेदांती ने राजनीतिक क्षेत्र में भी सक्रिय योगदान दिया। उन्हें 1996 और 1998 में भाजपा से प्रतापगढ़ लोकसभा सीट से सांसद चुना गया। उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी और अन्य भाजपा नेताओं का समर्थन करते हुए विध्वंस में उनकी भूमिका से इनकार किया। उनके राजनीतिक जीवन में भी स्पष्टवादिता और राम मंदिर को लेकर समझौता न करने की पहचान रही।

अंतिम दिन और योगदान

2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले और 2024 में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा को डॉ. वेदांती ने अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना बताया। अंतिम दिनों तक वे रामकथा और धार्मिक प्रवचन में सक्रिय रहे। रीवा में रामकथा के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और एयर एम्बुलेंस के कोहरे के कारण उन्हें समय पर लाया नहीं जा सका। अयोध्या में उनका अंतिम संस्कार होगा।

संतों और नेताओं की श्रद्धांजलि

अयोध्या के संतों और धर्माचार्यों ने उनके निधन पर गहरा शोक जताया। महंत नृत्य गोपाल दास, महंत रामशरण दास, महंत जनमेजय शरण और अन्य संतों ने कहा कि डॉ. वेदांती ने अपने जीवन को राम मंदिर और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। उनके निधन से हिंदुत्व और सनातन आंदोलन को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

निष्कर्ष: एक युग का समापन

डॉ. रामविलास दास वेदांती का जीवन राम भक्ति, संघर्ष और विवादों का संगम था। राम मंदिर आज भव्य रूप में खड़ा है, लेकिन इसके निर्माण की नींव उनके जैसे योद्धाओं की कुर्बानियों पर टिकी हुई है। उनका जाना राम मंदिर आंदोलन के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

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