उत्तर प्रदेशराज्य

योगी सरकार का बड़ा सियासी दांव! हर विधानसभा में 10 आंबेडकर स्मारकों का होगा कायाकल्प, 403 करोड़ रुपए होंगे खर्च

यूपी की BJP सरकार ने 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोट बैंक को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने डॉ बीआर अंबेडकर मूर्ति विकास योजना को मंजूरी दे दी. योजना के तहत प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर डॉ. भीमराव अंबेडकर समेत अन्य महापुरुषों, समाज सुधारकों और सांस्कृतिक विभूतियों के स्मारकों का संरक्षण, सौंदर्यीकरण और कायाकल्प किया जाएगा. हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे स्मारकों को नई पहचान दी जाएगी.

यूपी के डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि बाबा भीमराव अंबेडकर सहित जो सामाजिक न्याय के पुरोधा रहे हैं, उनकी प्रतिमा छत्र-चबूतरे के साथ में है और जहां पर छत्र-चबूतरा नहीं बना है. हम लोग वहां पर प्रतिमाओं का नवीनीकरण करके व्यवस्थित तरीके से कार्य करेंगे. इसका शुभारंभ हम लोग 14 अप्रैल से करने जा रहे हैं.

योगी सरकार के फैसले डॉ बीआर आंबेडकर मूर्ति पर छतरी और सुंदरीकरण पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री पर कोई भरोसा न करें. बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर ने दलित-शोषित-पीड़ितों को जो हक-अधिकार और आरक्षण दिए थे, ये लोग अब छतरी लगाने, मूर्तियों का सौंदर्यीकरण करने और सम्मान देने की बात कर रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि उन्होंने हर नौकरी में आरक्षण छीन लिया है. समाजवादी पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट है. सामाजिक न्याय के राज की स्थापना करना. हम बाबा साहब के दिए हक-अधिकारों की रक्षा करेंगे और छीने गए आरक्षण को वापस दिलाएंगे.

BJP का यह फैसला दुधारी तलवार जैसा

वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र कुमार कहते हैं- यूपी सरकार दलितों को यह संदेश देना चाहती है कि हम भी दलित समाज के हितैषी हैं. जो काम मायावती ने चार बार मुख्यमंत्री रहते नहीं किया. डॉ अंबेडकर की मूर्तियों पर छत नहीं लगवाई, पार्कों का सौंदर्यीकरण नहीं कराया. वह अब भाजपा कर रही है. यह बीजेपी की मंशा है लेकिन यह फैसला दुधारी तलवार जैसा है. चलाने की उम्मीद कम है, नुकसान की उम्मीद ज्यादा. भाजपा के लिए यह योजना रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है. पिछले साल अंबेडकर जयंती पर पार्टी ने 13 दिन का विशेष कार्यक्रम चलाया था. 13 से 25 अप्रैल तक संघ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने दलित बस्तियों में संपर्क अभियान चलाया.

लोकसभा चुनाव में BJP को करीब 8.5 % वोट का नुकसान

अब यह योजना उस अभियान को सरकारी स्तर पर संस्थागत रूप देने का काम करेगी. 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा को यूपी में करीब 8.5 प्रतिशत वोट का नुकसान हुआ था. सपा के PDA पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक फॉर्मूले और आरक्षण खत्म होगा, संविधान बदल जाएगा जैसे नरेटिव ने पार्टी को काफी झटका दिया था. उत्तर प्रदेश में दलित आबादी 20.7 प्रतिशत लगभग 4.14 करोड़ है. इसमें 66 उप-जातियां हैं, जिनमें छह प्रमुख उप-जातियां जाटव, पासी, कोरी, धोबी, खटिक, बाल्मिकी सहित कुल दलित आबादी का 87 प्रतिशत हिस्सा रखती हैं. जाटव सबसे एकजुट और बसपा के कोर वोटर माने जाते हैं, जबकि गैर-जाटव दलितों में बंटवारा ज्यादा है.

2011 से 2022 तक भाजपा ने गैर-जाटव वोटरों को साधकर अपनी वोट बैंक बढ़ाई थी, लेकिन 2024 में कुछ गैर-जाटव वोट इंडिया गठबंधन की ओर चले गए. दूसरी ओर, वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि भाजपा की यह सोची-समझी रणनीति है. बीजेपी ने बहुत बड़ा प्लान तैयार किया है. अगर यह सफल हुआ तो 2027 में सत्ता में वापसी हो सकती है.

‘सपा ने हमेशा हर वर्ग के महापुरुषों का अनादर किया’

हालांकि, परिणाम क्या होगा, यह चुनाव के बाद ही पता चलेगा. राजनीतिक नरेंद्र श्रीवास्तव इस योजना को भाजपा की दलित आउटरीच की नई कड़ी मान रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता हीरो बाजपाई का कहना है कि यह महापुरुषों के सम्मान का काम है, हीरो वाजपेई कहते हैं कि सपा ने हमेशा हर वर्ग के महापुरुषों का अनादर किया. लेकिन भाजपा सभी महापुरुषों का सम्मान करती है. अब सवाल यह है कि मूर्तियों का कायाकल्प दलित वोटों में कितना बदलाव लाता है और क्या यह भाजपा के लिए स्वर्ण-दलित के बीच संतुलन बनाए रख पाएगी. 2027 का चुनाव इसी का फैसला करेगा.

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