उत्तर प्रदेशराज्य

सीएम योगी का लापरवाही और मनमानी पर बड़ा ऐक्शन, मत्स्य निदेशक एनएस रहमानी समेत पांच निलंबित

लखनऊ। उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही के प्रकरण में बड़ी कार्रवाई की गई है। अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने निदेशक नूरुस्सबूर रहमानी सहित पांच अधिकारियों के निलंबन का आदेश जारी किया है।

मत्स्य विभाग में प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के क्रियान्वयन में लापरवाही और अनियमितताओं के आरोप में मत्स्य निदेशक नूरुस्सबर रहमानी को निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें मत्स्य कार्यालय मंडलायुक्त सहारनपुर मंडल से संबद्ध किया गया है।

मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद की संस्तुति पर अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने यह कार्रवाई की। निदेशक नूरुस्सबूर रहमानी के साथ ही वाराणसी में योजना के क्रियान्वयन से जुड़े मत्स्य अधिकारियों श्वेता सिंह, आकाश दीप, राजेंद्र और खुर्शीद आलम को भी निलंबित किया गया है।

मत्स्य निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने लखनऊ के विभागीय जलाशय में मत्स्याखेट ठेके की स्वीकृति महानिदेशक मत्स्य के अनुमोदन के बिना कर दी। संबंधित निविदा में तीन निविदादाताओं ने प्रतिभाग किया था, जिसमें एक निविदादाता की फाइनेंशियल बिड नॉट फाउंड थी। इसके बावजूद निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

प्रयागराज के गुलरिहा जलाशय व बहराइच के जलाशय में मत्स्याखेट ठेकों की स्वीकृति भी महानिदेशक मत्स्य के अनुमोदन के बिना जारी करने का आरोप लगाया गया है। लखनऊ के चकबंदी क्षेत्र में विभाग के कब्जे में दर्ज करीब 0.733 हेक्टेयर भूमि का अमलदरामद और सीमांकन नहीं कराने का मामला भी सामने आया।

निदेशक पर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 की अनुदानित परियोजनाओं के संचालन में भी लापरवाही और अनियमितता के भी आरोप हैं। आरोप हैं कि लाभार्थियों को भुगतान नहीं किया गया, सत्यापन नहीं कराया गया। इन आरोपों की जांच में प्रथम दृष्टया नूरुस्सबर रहमानी को दोषी मानते हुए निलंबित किया है।

वहीं पीएमएमएसवाई के तहत वाराणसी में लाभार्थियों को मिलने वाले अनुदान और संचालित परियोजनाओं में बरती गई अनियमितताओं के मामले में मत्स्य विभाग ने वहां तैनात पर चार अधिकारियों को भी निलंबित किया गया है। इनमें ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक एवं तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी राजेंद्र कुमार, ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक एवं तत्कालीन मत्स्य निरीक्षक मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी आकाश दीप सिंह, मत्स्य निरीक्षक एवं तत्कालीन मत्स्य विकास अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी खुर्शीद आलम और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अंबेडकर नगर एवं तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण वाराणसी श्वेता सिंह शामिल हैं। इन पर भी वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में आवंटित परियोजनाओं को स्थापित व संचालित कराने में अनियमितताओं के आरोप हैं।

मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के मुताबिक प्रारंभिक जांच की रिपोर्ट में कुछ अन्य मत्स्य अधिकारियों की भूमिका भी सामने आने के संकेत मिले हैं। इन अधिकारियों के खिलाफ विस्तृत जांच चल रही है। जांच में यदि किसी अधिकारी की लापरवाही, अनियमितता या किसी अन्य गलत कार्य में संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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