उत्तराखंडराज्य

उत्तराखंड परिवहन निगम मामला: सेवानिवृत्त कर्मचारियों से रिकवरी पर हाईकोर्ट की रोक

उत्तराखंड परिवहन निगम का मामला: मामले के अनुसार जगदीश प्रसाद पंत, राम सिंह व सुरेश चंद्र मासीवाल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थी. उन्होंने अपनी याचिका में कहा था कि उत्तराखंड परिवहन निगम में कई सालों से संतोषजनक सेवा करने के बाद वे सेवानिवृत्त हुए हैं. सेवानिवृत्त होने के दौरान उनको सेवानिवृत्त के लाभ दिए गए, लेकिन अब निगम उनको दिए गए लाभों को उनसे रिकवरी कर रहा है, जो कि विभागीय नियमावली, उत्तराखंड हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के खिलाफ है. क्योंकि एक बार दिए गए लाभों को दोबारा कर्मचारियों से नहीं वसूला जा सकता.

याचिकाकर्ताओं की मांग थी कि उत्तराखंड परिवहन निगम द्वारा वसूली की आदेश सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेश के विपरीत है. इसलिए उनकी रिकवरी आदेश पर रोक लगाई जाय. मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने पूर्व के आदेश के क्रम पर उनकी रिकवरी आदेश पर रोक लगाते हुए याचिकायें निस्तारित कर दी हैं.

उपनल के जरिए लगे फार्मासिस्टों को दी बड़ी राहत: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य की डिस्पेंसरी में उपनल के माध्यम से वर्षों से सेवारत फार्मासिस्टों के स्थान पर नई भर्ती प्रक्रिया शुरू किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की. कोर्ट ने याचिका के अंतिम निस्तारण से पूर्व याचिकाकर्ताओं को पद पर बनाये रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही राज्य सरकार, चिकित्सा सेवा भर्ती बोर्ड, उपनल व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने को कहा है.

न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की अवकाशकालीन एकल पीठ ने उपनल के माध्यम से सेवारत दीपक कुमार व 9 अन्य की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया है कि उन्हें वर्तमान पद पर कार्य करते रहने दिया जाए. साथ ही संबंधित विभाग को इन सभी याचिकाकर्ताओं के लिए पद सुरक्षित रखने के भी निर्देश दिए हैं.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने अपनी सेवा और पद की सुरक्षा को लेकर अदालत से गुहार लगाई थी, जिस पर गौर करते हुए कोर्ट ने यह अंतरिम व्यवस्था दी है. अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं के हितों की रक्षा के लिए अंतरिम उपाय के रूप में उन्हें उनके पदों से नहीं हटाया जाएगा.

अब इस मामले की अगली सुनवाई 13 फरवरी 2026 को तय की गई है. कोर्ट ने निर्देश दिया है कि इस याचिका को इसी तरह के एक अन्य याचिका संख्या 121/2026 के साथ सूचीबद्ध किया जाए, ताकि दोनों पर एक साथ विचार किया जा सके.

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