उत्तर प्रदेशराज्य

“अनुपम खेर ने किया बनारस लिटरेचर फेस्टिवल-4 का उद्घाटन, बच्चों के नाट्य मंचन से हुए भावुक”

वाराणसी: नदेसर स्थित एक सितारा होटल में शुक्रवार को पद्मभूषण अभिनेता अनुपम खेर ने बनारस लिटरेचर फेस्टिवल-4 का उद्घाटन किया. काशी की साहित्यिक फिजा में सृजन, स्मृति और साधना का अद्भुत संगम इस आयोजन संग धरती पर उतर आया. मंच पर उजास केवल दीपों का नहीं था, बल्कि अनुभव, संघर्ष और प्रेरणा का भी था.

उद्घाटन सत्र में स्कूली बच्चों के नाट्य मंचन के प्रस्तुत से अनुपम खेर भावविभोर हो उठे. उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति उन्हें सीधे अपने स्कूल के दिनों में ले गई. उन्होंने अपने जीवन के नाटक की स्मृति साझा करते हुए बताया, किस तरह उन्हें पृथ्वीराज चौहान की भूमिका के लिए चुना गया था, जबकि जयचंद की भूमिका दूधवाले के बेटे नंदू को मिली थी.

अनुपम खेर ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिभा से अधिक परिश्रम, अनुशासन और निरंतर अभ्यास ही किसी कलाकार को गढ़ता है. अभिनय केवल मंच या कैमरे की कला नहीं, बल्कि जीवन को गहराई से देखने और महसूस करने की साधना है.

बीएलएफ के अध्यक्ष दीपक मधोक ने स्वागत भाषण में कहा, काशी से ज्यादा उपयुक्त स्थान कोई और हो ही नहीं सकता. यहां धर्म, आध्यात्म, संस्कृति, संस्कार, संस्कृत आदि का अविरल प्रवाह है. इस संदर्भ में उन्होंने मार्क ट्वेन को उद्धृत करते हुए काशी की महिमा का बखान किया. बनारस लिटरेचर फेस्टिवल एक ऑर्गनाइज्ड टीम वर्क है. इस बार फेस्टिवल में 167 सेलिब्रिटीज आए हुए हैं. कई कार्यक्रम एक साथ संचालित हैं. इसमें 13 देशों के परफॉर्मेंस और 50 से अधिक देशों के दर्शक आए हुए हैं. अनुमानतः 1 फरवरी को महोत्सव के समापन तक लगभग 1 लाख लोग इसके साक्षी बनेंगे.
बता दें कि बीएलएफ-4 के उद्घाटन सत्र के दौरान दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ. इसमें सीआरपीएफ के डीआईजी निशित कुमार की पुस्तक ‘द बेंगलोर कांसेप्ट’ का विमोचन मंचासीन अतिथियों द्वारा किया गया. विमोचन के पश्चात लेखक निशित कुमार अपनी पुस्तक की विषय वस्तु एवं लेखन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में 61 हजार बुक मार्क का भी विमोचन किया गया. ‘द बुक मार्कड’ बनारस कार्यक्रम के तहत एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की ऑफिशियल के समुख 61 हजार बुक मार्क का प्रदर्शन किया गया. यह बुक मार्क 70 शहरों से आए सम्मिलित किए गए थे. इसे बच्चों द्वारा बनाया गया है, जिसमें आदिवासी क्षेत्र के भी बच्चों द्वारा बनाए गए बुक मार्क भी शामिल हैं.

बनारस लिटरेचर फेस्टिवल–4 के मंच पर जब प्रख्यात बांसुरी वादक पंडित राजेन्द्र प्रसन्ना की बांसुरी ने पहली सांस ली, तो समय मानो ठहर गया. स्वर, लय और नाद का ऐसा सुरम्य संधान बना कि सभागार क्षण भर में राग-लोक में रूपांतरित हो उठा. उन्होंने प्रस्तुति का शुभारंभ राग शुद्ध सारंग से किया. बांसुरी पर बहती यह रागधारा कभी एक ताल की गंभीरता में ठहरी, तो कभी द्रुत तीन ताल की चपल चाल में लहराई.पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कहा कि बनारस की ठुमरी को समझना है तो चार कंठ साधक ऐसे हैं, जिन्हें आप को सुनना ही सुनना होगा. उसके बिना आप ठुमरी गायन तो क्या इसकी परंपरा को भी नहीं समझ पाएंगे. ये नाम सिद्देश्वरी देवी, रसूलन बाई, गिरिजा देवी और महादेव मिश्र के हैं. वह बनारस लिट् फेस्ट के चौथे संस्करण में काशी के वरिष्ठ रंगकर्मी व्योमेश शुक्ल के साथ संवाद कर रही थीं.

बनारस लिटरेचर फेस्टिवल के चौथे संस्करण में भोजपुरी गायक, नायक और सांसद मनोज तिवारी भी मंच पर आए. लोक-सुर, स्मृतियां और संवाद तीनों का ऐसा सधा संगम बना कि श्रोता झूमते-गुनगुनाते रहे. मनोज तिवारी ने गायन की शुरुआत शिवभक्ति से की हर हर महादेव, हे तीनों लोक के देवा, हे देवों के देवा इन पंक्तियों के साथ ही काशी की आत्मा जैसे सुरों में उतर आई. इसके बाद ए राजा जी… और चर्चित रिंकिया के पापा… ने सभागार को तालियों और मुस्कानों से भर दिया.

जेन जी को लेकर अनुपम खेर ने क्या कहा: अनुपम खेर ने कहा कि हिन्दुस्तान का जेन-जी एक सैनिक की तरह है. सैनिक जहां बॉर्डर की रक्षा करता है. वहीं जेन-जी अपने शहरों एवं घरों में हमारी रक्षा के लिए है, जो लोग जेन-जी को लेकर गलतफहमी पाले हैं, वैसे लोग देश में उत्पात मचाने की कोशिश में रहते हैं. ऐसा बोलने वाले बहुत से जेन-जी के दादा हो गए हैं. ये लोग सोच रहे हैं कि जेन-जी सड़कों पर आ क्यों नहीं रहे हैं. इनके थिंक टैंक बैठकर नारे लगाते हैं. तरह-तरह के मुद्दे उछालते हैं. देश के अंदर कुछ लोग ऐसे हैं, जिनकी पहचान करना मुश्किल है. हालांकि, देश के अंदर वाले ऐसे लोग कुछ बिगाड़ नहीं सकते हैं. वास्तव में जेन-जी वो है, जो अपने टारगेट पर फोकस है और स्मार्ट है.

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