उत्तर प्रदेशराज्य

बांके बिहारी मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा‑ मौजूदा व्यवस्थाओं में कोई बदलाव नहीं होगा

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि वह वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की धार्मिक प्रथाओं के संबंध में कोई ढांचागत बदलाव नहीं करेगा। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत एवं जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और अधिवक्ता तनवी दुबे की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए मामले को दो हफ्ते बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, ताकि पक्षकार हाल में दाखिल स्थिति रिपोर्ट पर जवाब दाखिल कर सकें।

शीर्ष अदालत ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर प्रबंधन समिति एवं सेवायतों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के हालिया प्रशासनिक निर्णयों को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि ये निर्णय प्राचीन धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप हैं।

न्याय अध्यादेश के हिस्सों पर लगा दी थी रोक

इससे पूर्व अदालत ने उत्तर प्रदेश श्री बांके बिहारी जी मंदिर न्याय अध्यादेश, 2025 के कुछ हिस्सों पर रोक लगा दी थी और मंदिर के कामकाज की देखरेख के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश अशोक कुमार की अध्यक्षता में 12 सदस्यीय एचपीसी का गठन किया था।

दीवान ने अदालत को बताया कि उन्हें स्थिति रिपोर्ट रविवार देर शाम प्राप्त हुई और उन्हें जवाब देने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाए। इस पर प्रधान न्यायाधीश ने सुनवाई स्थगित करते हुए कहा, ‘हम वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव करने के पक्ष में नहीं हैं।’

रविवार को स्थिति रिपोर्ट की गई थी दाखिल

एएसजी केएम नटराज ने कहा कि एचपीसी अदालत के निर्देशों के अनुसार चलना चाहती है और इस मामले में कोई विरोधी रुख नहीं अपनाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने 15 दिसंबर, 2025 को याचिका पर नोटिस जारी किए थे और रविवार को स्थिति रिपोर्ट दाखिल की गई थी।

याचिका में मुख्य रूप से मंदिर में दर्शन के समय में परिवर्तन और देहरी पूजन समेत कुछ आवश्यक धार्मिक प्रथाओं पर रोक को चुनौती दी गई है।

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