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​जिम्स अस्पताल में सुरक्षाकर्मियों की गुंडई: सॉफ्टवेयर इंजीनियर को बेरहमी से पीटा, पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल अब तक मामला दर्ज नहीं

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के शो विंडो कहे जाने वाले गौतमबुद्ध नगर के कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) से एक मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले गार्डों पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर (मरीज के अटेंडेंट) के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना 14 तारीख की बताई जा रही है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक मामला दर्ज नहीं किया है। सीसीटीवी निकलने की बात कर के टालती रही पीड़ित से कहा जाँच कर के करवाई होंगी

​क्या है पूरा मामला?

​मिली जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवक एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर है और वह कासना स्थित जिम्स अस्पताल में भर्ती अपने एक परिजन की देखभाल के लिए वहां मौजूद था। बताया जा रहा है कि आईसीयू के बाहर किसी बात को लेकर सुरक्षाकर्मियों और पीड़ित के बीच मामूली कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि अस्पताल के 10 से 15 गार्डों ने मिलकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर को घेर लिया और उस पर टूट पड़े।

​पीड़ित को लात-घूसों से इतनी बेरहमी से पीटा गया कि उसे गंभीर चोटें आई हैं। अस्पताल परिसर, जो शांति और उपचार के लिए जाना जाता है, उस वक्त अखाड़े में तब्दील हो गया। मौके पर मौजूद अन्य लोगो ने बचाने की कोशिश की लेकिन सुरक्षाकर्मियों का तांडव जारी रहा। पीड़ित ने तुरंत 112 को सुचना दी और मोके पर पुलिस आई।

​पुलिस की कार्रवाई और ढुलमुल रवैया

​घटना की सूचना मिलने पर थाना कासना पुलिस ने शुरुआती जांच के आधार पर दो गार्डों को हिरासत में लेकर 151 शांतिभांग की मामूली धारा में जेल तो भेज दिया, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि एफआईआर (मुकदमा) दर्ज करने में पुलिस हीला-हवाली कर रही है।
और अभी तक मामला दर्ज नहीं किया है

​सीसीटीवी फुटेज: पुलिस का कहना है कि वे सीसीटीवी कैमरों की जांच कर रहे हैं और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब तक करवाई नहीं की आखिर किस बड़ी घटना का इंतज़ार कर रही है कासना पुलिस जबकि कमिश्नर मैडम का सख्त निर्देश है कि कोई भी घटना हो मामले को तुरंत दर्ज किया जाए

​ घटना को हुए कई दिन बीत चुके हैं, फिर भी औपचारिक मुकदमा दर्ज न होना कासना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
Gims के डायरेक्टर राकेश गुप्ता से भी इस मामले की शिकायत की गई

​अस्पताल प्रशासन की चुप्पी

​जिम्स जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में इतनी बड़ी घटना हो जाना और प्रशासन का अपने गार्डों पर नियंत्रण न होना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता है। सवाल यह है कि क्या अस्पताल में तैनात सुरक्षा एजेंसियां कर्मचारियों का बैकग्राउंड चेक करती हैं? एक पढ़ा-लिखा व्यक्ति, जो पहले से ही अपने परिजन की बीमारी के कारण मानसिक तनाव में है, उसे इस तरह शारीरिक प्रताड़ना देना किस हद तक जायज है?

​यह घटना न केवल पुलिस प्रशासन की सुस्ती को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि रसूख और भीड़ के तंत्र के आगे आम आदमी कितना लाचार है। अगर समय रहते दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया, तो इस तरह के असामाजिक तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे।

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