पंजाबराज्य

मानसून सत्र के चौथे दिन पंजाब विधानसभा में हंगामे के आसार, सरकार रखेगी कई अहम प्रस्ताव

चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन गुरुवार को सरकार कई महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्तावों और विधायी कार्यों को सदन के पटल पर रखेगी। प्रश्नकाल और शून्यकाल के बाद विभिन्न विभागों से जुड़े विधेयकों, विनियोग प्रस्तावों तथा वर्ष 2026-27 की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी।

वहीं, विपक्ष पहले से ही विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार पर हमलावर है। ऐसे में बुधवार की तरह गुरुवार को भी सदन में तीखे हंगामे के आसार हैं। वित्त मंत्री हरपाल चीमा वर्ष 2026-27 के लिए सरकारी उपक्रम समिति की 129वीं रिपोर्ट सदन में पेश करेंगे।

इसके अलावा विभिन्न विभागों से संबंधित वर्ष 2019-20 से 2023-24 तक की वार्षिक रिपोर्टें और लेखा-जोखा भी सदन के समक्ष रखा जाएगा। विधानसभा में आज शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस को लेकर संकल्प प्रस्ताव भी लाया जाएगा।

प्रस्ताव में तीनों महान क्रांतिकारियों के बलिदान को याद करते हुए युवाओं को उनके विचारों से जोड़ने और उनके योगदान को व्यापक स्तर पर सम्मान देने की बात कही गई है। इसके साथ ही कृषि एवं किसान कल्याण से जुड़े विषयों पर भी चर्चा प्रस्तावित है।

कार्यसूची में केंद्र सरकार से कृषि को राज्य सूची का विषय बनाने की मांग, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, कृषि अनुसंधान तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर प्रस्ताव शामिल हैं। सरकार इन प्रस्तावों के माध्यम से केंद्र के समक्ष पंजाब के किसानों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का प्रयास करेगी।

ध्यान रहे की विधानसभा में बीते बुधवार को जागत जोत संशोधन बिल 2026 को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया था। विधानसभा के बाहर कांग्रेस एबीवीपी की ओर से पेपर लीक को लेकर सचिवालय की और कूच करने की कोशिश की गई थी।

वहीं कर्मचारियों ने भी सचिवालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया था। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कई बार स्थिति ऐसी बनी कि स्पीकर को हस्तक्षेप करना पड़ा।

विपक्ष पहले ही संकेत दे चुका है कि कर्मचारियों के आंदोलन, कानून-व्यवस्था, वित्तीय स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर वह सरकार को घेरना जारी रखेगा। ऐसे में गुरुवार को भी सदन के भीतर तीखी बहस और हंगामे की पूरी संभावना है। सरकार जहां अपने प्रस्तावों को पारित कराने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति के साथ सदन में उतरेगा।

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