उत्तर प्रदेशराज्य

लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल के वित्तीय व प्रशासनिक अधिकार सीज, हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच का आदेश

लखनऊ: लखनऊ नगर निगम में वार्ड संख्या-73 फैजुल्लागंज से समाजवादी पार्टी के कोर्ट द्वारा निर्वाचित पार्षद को शपथ न दिलाए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने लखनऊ की भाजपा महापौर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार तत्काल प्रभाव से फ्रीज कर दिए हैं.

हाईकोर्ट ने क्या कहा: हाईकोर्ट की डबल बेंच, जिसमें जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस कमर हसन रिजवी शामिल थे. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को विधिवत शपथ नहीं दिलाई जाती, तब तक महापौर अपने वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगी. कोर्ट ने यह जिम्मेदारी फिलहाल जिला प्रशासन और नगर आयुक्त को सौंप दी है.

क्या है पूरा मामला: लखनऊ नगर निकाय चुनाव 2023 में वार्ड-73 फैजुल्लागंज सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रदीप कुमार शुक्ला उर्फ टिंकू शुक्ला को विजयी घोषित किया गया था. मतगणना में उन्हें 4,972 वोट मिले थे, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी ललित तिवारी को 3,298 वोट प्राप्त हुए थे. हालांकि चुनाव परिणाम के बाद सपा प्रत्याशी ललित तिवारी ने मई 2023 में अदालत का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने नामांकन पत्र दाखिल करते समय कई जरूरी जानकारियां छिपाई थीं, जो चुनावी नियमों के तहत देना अनिवार्य था. याचिका में इसे गंभीर चुनावी अनियमितता और कदाचार बताया गया.

करीब ढाई वर्ष चली सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 को भाजपा प्रत्याशी का निर्वाचन निरस्त करते हुए ललित तिवारी को निर्वाचित घोषित कर दिया. अदालत ने माना कि नामांकन प्रक्रिया में आवश्यक सूचनाएं न देना चुनाव की वैधता को प्रभावित करता है.

पांच महीने बाद भी नहीं दिलाई गई शपथ: निर्वाचन न्यायाधिकरण के फैसले के बावजूद ललित तिवारी को अब तक पार्षद पद की शपथ नहीं दिलाई गई. इस पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि कोर्ट से निर्वाचित घोषित होने के बाद भी उन्हें कार्यभार ग्रहण नहीं करने दिया जा रहा, जबकि पूर्व भाजपा पार्षद अब भी पद पर बने हुए हैं. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के सामने यह तथ्य भी आया कि जिला मजिस्ट्रेट ने जनवरी और फरवरी 2026 में नगर आयुक्त को कई बार पत्र भेजकर शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराने के निर्देश दिए थे. राज्य सरकार की ओर से भी आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया था, लेकिन इसके बावजूद आदेश का पालन नहीं हुआ.

विपक्ष ने बोला हमला: पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने भाजपा पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को न्यायालय के आदेशों का सम्मान करना चाहिए, लेकिन भाजपा नेतृत्व खुद संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनदेखी करता रहा है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा महापौर के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकारों पर रोक लगाना इस बात का स्पष्ट संदेश है कि न्यायपालिका से ऊपर कोई नहीं है. न्यायालय के आदेश के बाद निर्वाचित पार्षद को शपथ दिलाना महापौर की संवैधानिक जिम्मेदारी थी.

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