उत्तर प्रदेशराज्य

लखनऊ हत्याकांड: प्रज्ञा मिश्रा का शक सही निकला, मानस अकेला नहीं था, पुलिस को मिले साक्ष्य

लखनऊ। बैंककर्मी मानस बाजपेयी द्वारा मैनेजर पत्नी दिव्या मिश्रा और बहन की हत्या के बाद खुदकुशी के मामले की जांच अब कॉल डिटेल रिकार्ड (सीडीआर) पर टिक गई है। पुलिस ने मानस, दिव्या और ऑटो चालक प्रमोद के मोबाइल की सीडीआर निकलवाई है।

शुरुआती पड़ताल में सामने आया है कि मानस ने घटना वाले दिन सुबह से ऑटो चालक को सुबह से कई बार फोन किए थे। अब प्रमोद से दोबारा विस्तृत पूछताछ की जाएगी। दिव्वाय ने आखिरी बार बात अपने क्लाइंट से की थी।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि मानस की सीडीआर में सुबह से दो तीन लोगों से बात हुई, लेकिन सबसे ज्यादा ऑटो चालक प्रमोद से बात हुई थी। उसी के साथ वह आता-जाता था। अब पुलिस की जांच प्रमोद के आसपास घूम रही है। आखिर प्रमोद रोज उसको छोड़ने और लेने जाता था, तो उसको कभी शक नहीं हुई था। इसके लिए प्रमोद को दोबारा बुलाया जाएगा।

उधर, दिव्या का सीडीआर सामान्य है। उसने आखिरी बार बात क्लाइंट से की थी, जिससे बैंक से जुड़ी कुछ बाते हुई। अब जांच की सुई ऑटो चालक पर आकर टिकी हुई है।

इसके साथ ही जांच में तीन पिस्टल बरामद होने के बाद सबसे बड़ा सवाल इनके मानस तक पहुंचने का है। पुलिस हथियारों के स्रोत और मानस के संपर्कों की पड़ताल कर रही है। उपलब्ध जांच के मुताबिक तीनों हथियारों में एक से ही फायरिंग हुई थी।

प्रज्ञा के सवालों से बढ़ी जांच की पेचीदगी

दिव्या की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने इंटरनेट मीडिया पोस्ट के जरिए कई सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जांच का केंद्र केवल मानस की मानसिक स्थिति या घरेलू विवाद तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि जिस व्यक्ति के घर में सामान्य तौर पर हथियार होने की बात सामने नहीं आई, उसके पास तीन पिस्टल और तमंचा कैसे पहुंचे? हथियार किसने उपलब्ध कराए और क्या किसी ने मानस को इस हत्याकांड के लिए तैयार या उकसाया?

प्रज्ञा ने यह भी सवाल उठाया कि दिव्या की हत्या और मानस के घर पहुंचने के बीच के समय में वह कहां था। क्या वह रास्ते में किसी से मिला था? उन्होंने मानस के अंतिम वाट्सएप स्टेटस की भाषा को लेकर भी सवाल किया है और पूछा कि क्या स्टेटस किसी और ने अपडेट किया था।

इसके अलावा घर में किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी और आने-जाने के किसी अन्य रास्ते की भी जांच की मांग की है। ऐसे सवालों का उल्लेख पहले भी उनकी सार्वजनिक पोस्ट के संदर्भ में सामने आया है।

स्त्रीधन और एलिमनी पर भी सफाई

प्रज्ञा ने पोस्ट में दिव्या द्वारा डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी मांगे जाने की चर्चा को गलत बताया। उन्होंने कहा कि स्त्रीधन और एलिमनी अलग-अलग कानूनी अवधारणाएं हैं। उनके मुताबिक दिव्या का तलाक का मामला अभी शुरुआती चरण में था और इसे सीधे डेढ़ करोड़ रुपये की एलिमनी से जोड़ना गलत है। उन्होंने कहा कि स्त्रीधन में शादी से पहले, शादी के समय या बाद में महिला को मिले उसके व्यक्तिगत उपहार और जेवर शामिल होते हैं।

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