पंजाब

सुखजिंदर रंधावा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने का फर्जी पत्र वायरल

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पंजाब कांग्रेस की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब सोशल मीडिया पर कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंजाब कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने संबंधी एक कथित पत्र तेजी से वायरल होने लगा। यह पत्र उस समय सामने आया जब हाल ही में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने नई दिल्ली में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी। वायरल पत्र के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तुरंत इसे फर्जी दस्तावेज करार देते हुए किसी भी प्रकार की आधिकारिक नियुक्ति से इनकार कर दिया।

वायरल पत्र में दावा किया गया था कि कांग्रेस हाईकमान ने सुखजिंदर सिंह रंधावा को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपने का फैसला कर लिया है। हालांकि, पार्टी सूत्रों और वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है और सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज पूरी तरह से भ्रामक एवं फर्जी है। इसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया तथा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई।

सुखजिंदर सिंह रंधावा ने स्वयं सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आकर वायरल पत्र को फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि यह उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने और कांग्रेस कार्यकर्ताओं को गुमराह करने की सुनियोजित कोशिश है। रंधावा ने इस पूरे मामले को गंभीर बताते हुए पंजाब पुलिस के महानिदेशक (DGP) को औपचारिक शिकायत सौंप दी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिकायत में रंधावा ने कहा है कि फर्जी दस्तावेज तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित करना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के भी खिलाफ है। उन्होंने मांग की कि मामले की गहन साइबर जांच कराई जाए ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जी पत्र किसने तैयार किया, किसने उसे वायरल किया और इसके पीछे किसका उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

रंधावा ने यह भी कहा कि यह पहला अवसर नहीं है जब उन्हें निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी सोशल मीडिया पर उनकी मृत्यु की झूठी खबर फैलाकर भ्रम पैदा करने का प्रयास किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण शरारती तत्वों के हौसले बढ़े हैं। उन्होंने पुलिस प्रशासन से इस बार सख्त कदम उठाने की मांग की है ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की फर्जी खबरें और दस्तावेज प्रसारित करने का साहस न कर सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक बदलावों और नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच इस तरह के फर्जी पत्र का वायरल होना पार्टी के भीतर भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास हो सकता है। फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि संगठन से जुड़ा कोई भी फैसला केवल अधिकृत माध्यमों से ही घोषित किया जाएगा। वहीं अब सभी की नजरें पुलिस जांच और साइबर सेल की कार्रवाई पर टिकी हैं।




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