उत्तर प्रदेशराज्य

संभल हिंसा मामला: पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर रोक बढ़ी

प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल में नवंबर 2024 में भड़की हिंसा के दौरान घायल हुए युवक के पिता की शिकायत पर तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी सहित कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने संबंधी पूर्व सीजेएम के आदेश पर लगाई गई रोक को आगे बढ़ा दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने दिया है।

मंगलवार को शिकायतकर्ता यामीन के वकील ने जवाबी हलफनामा दाखिल किया। कोर्ट ने याची अनुज कुमार चौधरी के वकील को इसका उत्तर देने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई के लिए 21 अप्रैल की तारीख लगा दी और पूर्व में दिए गए अंतरिम आदेश को तब तक के लिए बढ़ा दिया।

सीजेएम संभल ने नौ जनवरी को सीओ तथा अन्य पुलिस वालों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने भी सीजेएम के आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल की है। दोनों याचिकाओं की एक साथ सुनवाई हुई।

यह है मामला

आलम नामक युवक के पिता यामीन ने तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के समक्ष प्रार्थना पत्र दिया था।

सीजेएम ने बीएनएसएस की धारा 173(4) के तहत दाखिल वह प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया था, जिसमें आरोप था कि 24 नवंबर, 2024 को जब आलम, संभल के मोहल्ला कोट स्थित जामा मस्जिद के पास ठेले पर बिस्कुट बेच रहा था, तभी पुलिस अधिकारियों ने अचानक भीड़ पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग शुरू कर दी। सीओ अनुज चौधरी और संभल कोतवाली प्रभारी अनुज कुमार तोमर को आरोपित बनाया था।

सीजेएम ने आदेश में टिप्पणी की थी कि पुलिस आपराधिक कृत्यों के लिए ‘आधिकारिक कर्तव्य की ढाल’ का सहारा नहीं ले सकती। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा था कि किसी व्यक्ति पर फायरिंग करना आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन नहीं माना जा सकता। निष्कर्ष दिया था कि प्रथमदृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और सच्चाई उचित जांच से ही सामने आ सकती है।

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