
हरियाणा सरकार ने सहकारी समितियों में 100 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त किए गए तीन अधिकारियों की नौकरी फिर से बहाल कर दी है। ये अधिकारी सहायक रजिस्ट्रार अनु कौशिश, उप मुख्य लेखा परीक्षक योगेंद्र अग्रवाल और सहायक रजिस्ट्रार रामकुमार हैं।
बर्खास्तगी के आदेश वापस और निलंबन
सरकार ने अब इन अधिकारियों को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराने का फैसला लिया है। यह वही अधिकारी हैं, जिन्हें पिछली मनोहर सरकार ने 2024 में भ्रष्टाचार के मामले में बर्खास्त किया था और इसे विधानसभा में सख्ती का उदाहरण बताया गया था।
हाई कोर्ट की चुनौती और समीक्षा
बर्खास्तगी के खिलाफ अधिकारियों द्वारा हाई कोर्ट में अपील करने के बाद सरकार ने अपने फैसले की समीक्षा की। एजी कार्यालय की राय के आधार पर यह निष्कर्ष निकला कि केवल एफआईआर के आधार पर बर्खास्तगी कानूनी रूप से कमजोर है, विशेष रूप से जब पहले विभागीय जांच की मंजूरी दी जा चुकी थी।
आगे की प्रक्रिया
अब विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही अधिकारियों के खिलाफ अंतिम कार्रवाई की जाएगी। सरकार का यह निर्णय कानूनी प्रक्रिया और न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में लिया गया है।



