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बारिश बनी ‘कुदरती कवच’, अमृतसर में प्रदूषण घटा, मरीजों को राहत

अमृतसर (दलजीत): अमृतसर में सर्दियों की पहली बारिश ने जिला निवासियों को लंबे समय से जारी स्मॉग (धुएं वाली धुंध) और प्रदूषण से बड़ी राहत दिलाई है। प्रदूषण के स्तर में आई गिरावट के कारण जहां छाती से संबंधित बीमारियों के मरीजों को सुख का सांस मिलेगा, वहीं विभिन्न प्रकार के फ्लू के मामलों में भी कमी आने की उम्मीद है। इस बारिश से पहले शहर में फैली स्मॉग के कारण खांसी, जुकाम और बुखार जैसी बीमारियों ने बच्चों और बुजुर्गों को बुरी तरह प्रभावित किया हुआ था।

स्वास्थ्य प्रणाली पर पड़ेगा सकारात्मक असर
जिले में पिछले काफी समय से बारिश न होने के कारण प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा तक बढ़ गया था। पिछले तीन वर्षों के मुकाबले इस बार छाती के रोगों के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की लंबी कतारें देखने को मिल रही थीं। सांस, दमा, इन्फेक्शन और निमोनिया के केस दिनों-दिन बढ़ रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार, अब हुई इस बारिश ने वातावरण को साफ करके बीमारियों की रोकथाम के लिए ‘कुदरती कवच’ का काम किया है।
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छाती के रोगों से मिलेगी निजात
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के टी.बी. कंट्रोल प्रोग्राम के अधिकारी और पूर्व जिला टी.बी. अधिकारी डॉ. नरेश चावला ने बताया कि बारिश से हवा में मौजूद जहरीले कण बैठ गए हैं। मौसम साफ होने से सांस और दमे के मरीजों की मुश्किलें कम होंगी। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से प्रदूषण के कारण मरीजों को बेहद परेशान होना पड़ रहा था, लेकिन अब हालात सुधरेंगे।

फ्लू के मामलों में आएगी गिरावट
सरकारी टी.बी. अस्पताल के डॉ. संदीप महाजन ने जानकारी दी कि सर्दियों के दौरान कई तरह के वायरल फ्लू सक्रिय हो जाते हैं। बारिश होने से वातावरण की सफाई हुई है, जिससे इन्फेक्शन फैलने का खतरा घटेगा। हालांकि, उन्होंने लोगों को सचेत किया कि बारिश के बाद बढ़ी ठंड से बचाव रखना जरूरी है।

टी.बी. मरीजों के लिए विशेष सलाह
सरकारी टी.बी. अस्पताल के डॉ. विशाल वर्मा ने कहा कि भले ही आम लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन टी.बी. के मरीजों को अभी भी अधिक सावधान रहने की जरूरत है। सर्दियों में टी.बी. के केस बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए मरीज अपनी दवा नियमित रूप से लें और छाती को ठंड से बचाकर रखें।

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