उत्तर प्रदेशराज्य

ऊंचे अपार्टमेंट बनाने की व्यवस्था में यूपी सरकार ने किया बदलाव, अब यहां से लेनी होगी अनुमति

लखनऊ। शहर के निर्मित एवं अनिर्मित क्षेत्रों में स्थित भूखंड पर ज्यादा निर्माण करने के लिए क्रय योग्य एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) या प्रीमियम क्रय योग्य एफएआर की अनुमति देने के लिए राज्य सरकार ने विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष व आवास आयुक्त की अध्यक्षता में समिति गठित कर दी है।

समिति तभी क्रय योग्य एफएआर की अनुमति देने की संस्तुति कर सकेगी जब संबंधित मानचित्र के परीक्षण व स्थलीय निरीक्षण में मानक संबंधी तमाम अपेक्षाएं पूरी हो रही होंगी। इस संबंध में शासन ने सात बिन्दुओं की चेकलिस्ट भी सभी प्राधिकरण व परिषद को भेजी है।

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव पी गुरूप्रसाद की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार समिति के सदस्यों में अपर जिलाधिकारी, लोक निर्माण विभाग व जल निगम के अधीक्षण अभियंता, मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक के प्रतिनिधि के तौर पर सहायक नियोजक, स्थानीय अग्निशमन अधिकारी, विकास प्राधिकरण या परिषद के मुख्य अभियंता होंगे।

परिषद या प्राधिकरण के मुख्य नगर नियोजक समिति के संयोजक सदस्य होंगे। शासनादेश में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि पिछले वर्ष चार जुलाई को जारी उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों के लिए माडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा मॉडल जोनिंग रेग्युलेशन्स 2025 संबंधी शासनादेश में किए गए प्रविधान के तहत समिति गठित की गई है।

समिति क्रय योग्य एफएआर की अनुमति के लिए संस्तुति करने से पहले सात बिन्दुओं की चेकलिस्ट की अपेक्षाओं को परखेगी। मानचित्र व स्थलीय निरीक्षण के आधार पर प्रस्तावित निर्माण के सापेक्ष सेट बैक, स्ट्रक्चरल सेफ्टी, अग्निशमन सुरक्षा, पार्किंग व्यवस्था तथा अवस्थापना सुविधाओं के मानकों को देखा जाएगा।

अवस्थापना सुविधाओं में पहुंच मार्ग की चौड़ाई, जलापूर्ति, सीवरेज व ड्रेनेज निस्तारण की स्थिति, बिजली आपूर्ति की व्यवस्था के अलावा रूफटाप रेनवाटर हार्वेस्टिंग तथा सोलर वाटर हीटिंग सिस्टम की व्यवस्था को उपविधि के मानकों के अनुसार देखा जाएगा।

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